राजा मेहदी अली खान - वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो (रफ़ी, खान मसताना)

गीतकार : राजा मेहदी अली खानराग :
चित्रपट : शहीद (१९४८)संगीतकार : गुलाम हैदर
भाव : बलिदानगायन : मोहम्मद रफ़ी, खान मसताना
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो,
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो,
पुकारते हैं ये जमीन ओ आसमां शहीद हो,
पुकारते हैं ये जमीन ओ आसमां शहीद हो।

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की जिन्दगी,
तेरे लहू से जाग उठेगी इस चमन की जिन्दगी,
खिलेंगे फूल उस जगह पे तू जहाँ शहीद हो,
खिलेंगे फूल उस जगह पे तू जहाँ शहीद हो।

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

गुलाम उठ वतन के दुश्मनों से इंतकाम ले,
इन अपने दोंनो बाजुओं से खंजरों का काम ले,
चमन के वासते चमन के बागबां शहीद हो,
चमन के वासते चमन के बागबां शहीद हो।

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

पहाड़ तक भी कांपने लगे तेरे जुनून से,
तू आसमां पे इंकलाब लिख दे अपने खून से, खून से,
जमीन ही तेरा वतन है आसमां शहीद हो,
जमीन ही तेरा वतन है आसमां शहीद हो।

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो,
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो,
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो,
ओऽ पुकारते हैं ये जमीन ओ आसमां शहीद हो,
पुकारते हैं ये जमीन ओ आसमां शहीद हो।

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

वतन की लाज जिसको थी अजीज अपनी जान से,
वो नौजवान जा रहा है आज कितनी शान से,
इस एक जवां की खाक पर हर एक जवां शहीद हो,
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

है कौन खुशनसीब माँ, कि जिसका ये चिराग है, चिराग है,
वो खुशनसीब है कहाँ ये जिसके सर का ताज है,
अमर वो देश क्यों ना हो कि तू जहाँ शहीद हो,
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।

शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की जिन्दगी,

तेरे लहू से जाग उठेगी इस चमन की जिन्दगी, जिन्दगी,
खिलेंगे फूल उस जगह पे तू जहाँ शहीद हो,
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो।





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