मजरूह सुल्तानपुरी - बैयाँ ना धरो ओ बलमा, ना करो मोसे रार (लता)

गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरीराग : चंद्रमौली
चित्रपट : दस्तक (१९७०) संगीतकार : मदन मोहन
भाव : रासगायन : लता मङ्गेश्कर
बैयाँ ना धरो, ओ बलमा।

बैयाँ ना धरो ओ बलमा,
बैयाँ ना धरो ओ बलमा,
ना करो मोसे रार।
बैयाँ ना धरो ओ बलमा॥स्थायी॥

ढ़लेगी चुनरिया तन-से,
ढ़लेगी चुनरिया तन-से,
तन-से, तन-से, आऽ।

ढ़लेगी चुनरिया तन-से,
हँसेगी रे चूड़ियाँ छन-से,
हँसेगी रे चूड़ियाँ, छन-से,
छन-से हँसेगी रे चूड़ियाँ,
मचेगी झंकार॥१॥

बैयाँ ना धरो, ना धरो,
ना धरो ओ बलमा।

मोहे छोड़ आये सजना,
मोहे छोड़ आये, मोहे छोड़ो,
मोहे, छोड़ो, छोड़ो, छोड़ो सजना।

मोहे छोड़ आये सजना,
दिया सीस उठाये सजना,
दिया सीस उठाये, उठाये सजना,
दिया सीस उठाये सजना,
रहा मोहे निहार॥२॥

बैयाँ ना धरो, ना धरो,
ना धरो ओ बलमा।

मैं तो आप बहकी-बहकी,
मैं तो आप बहकी-बहकी,
बहकी, बहकी, आऽ।

मैं तो आप बहकी-बहकी,
चलूँ जैसे महकी-महकी,
चलूँ जैसे महकी-महकी,
चलूँ जैसे महकी,
चमेलियों की डार॥३॥

बैयाँ ना धरो ओ बलमा,
ना करो मोसे रार।
बैयाँ ना धरो, ना धरो,
ना धरो।




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