मजरूह सुल्तानपुरी - तसवीर तेरी दिल में, जिस दिन से उतारी है (लता, रफ़ी)

गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरीराग :
चित्रपट : माया (१९६१)संगीतकार : सलील चौधरी
भाव : प्रेमालापगायन : लता मङ्गेश्कर, मोहम्मद रफ़ी
तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग लेके,
नए-ऩए रंग लेके,
सपनों की महफिल में॥स्थायी॥

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग लेके,
नए-ऩए रंग लेके,
सपनों की महफिल में।

तसवीर तेरी दिल में।

माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म।
माथे की बिंदिया तू है सनम,
नैनों का कजरा पिया तेरा ग़म।

नैन के नीचे-नीचे, रहूँ तेरे पीछे-पीछे,
चलूँ किसी मंजिल में॥१॥

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग लेके,
नए-ऩए रंग लेके,
सपनों की महफिल में।

तसवीर तेरी दिल में।

तुमसे नज़र जब गयी है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल।
तुमसे नज़र जब गयी है मिल,
जहाँ हैं कदम तेरे वहीं मेरा दिल।

झुकें जहाँ पलकें तेरी, खुलें जहाँ ज़ुल्फें तेरी,
रहूँ उसी मंज़िल में॥२॥

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग लेके,
नए-ऩए रंग लेके,
सपनों की महफिल में।

तसवीर तेरी दिल में।

तूफ़ान उठायेगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र।
तूफ़ान उठायेगी दुनिया मगर,
रूक ना सकेगा दिल का सफ़र।

यूँ ही नजर मिलती होगी, यूँ ही शमाँ जलती होगी,
तेरी-मेरी मंजिल में॥३॥

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग लेके,
नए-ऩए रंग लेके,
सपनों की महफिल में।

तसवीर तेरी दिल में,
जिस दिन से उतारी है,
फिरूँ तुझे संग लेके,
नए-ऩए रंग लेके,
सपनों की महफिल में।

तसवीर तेरी दिल में।

गुलज़ार - तुम पुकार लो तुम्हारा इंतजार है (हेमंत)

गीतकार : गुलज़ारराग :
चित्रपट : खामोशी (१९६९)संगीतकार : हेमन्त दा
भाव : विरहगायन : हेमन्त दा
हममऽ

तुम पुकार लो,
तुम्हारा इंतजार है,
तुम पुकार लो।
ख्वाब चुन रही है रात, बेकरार है,
तुम्हारा इंतजार है॥स्थायी॥

तुम पुकार लो।

होंठ पे लिये हुये दिल की बात हम,
जागते रहेंगे और कितनी रात हम।
होंठ पे लिये हुये दिल की बात हम,
जागते रहेंगे और कितनी रात हम।

मुख्तसर-सी बात है, तुमसे प्यार है,
तुम्हारा इंतजार है॥१॥

तुम पुकार लो।

दिल बहल तो जायेगा इस ख्याल से,
हाल मिल गया तुम्हारा अपने हाल से।
दिल बहल तो जायेगा इस ख्याल से,
हाल मिल गया तुम्हारा अपने हाल से।

रात ये करार की बेकरार है,
तुम्हारा इंतजार है॥२॥

०ऽऽऽ

राजेन्द्र कृष्ण - तुम ही मेरे मंदिर, तुम ही मेरी पूजा (लता)

गीतकार : राजेन्द्र कृष्ण
राग : यमन
चित्रपट : खानदान (१९६५)
संगीतकार : रवि
भाव : समर्पण
गायन : लता मङ्गेश्कर
तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो॥स्थायी॥

कोई मेरी आँखों से,
देखे तो समझे,
कि तुम मेरे क्या हो,
कि तुम मेरे क्या हो।

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

जिधर देखती हूँ,
उधर तुम ही तुम हो।
ना जाने मगर,
किन ख्यालों में गुम हो।
जिधर देखती हूँ,
उधर तुम ही तुम हो।
ना जाने मगर,
किन ख्यालों में गुम हो।

मुझे देखकर तुम,
ज़रा मुस्कुरा दो,
नहीं तो मैं समझूँगी,
मुझसे ख़फ़ा हो॥१॥

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

तुम ही मेरी माथे की,
बिंदिया की झिलमिल।
तुम ही मेरे हाथों के,
गजरों के मंजिल।
तुम ही मेरी माथे की,
बिंदिया की झिलमिल।
तुम ही मेरे हाथों के,
गजरों के मंजिल।

मैं हूँ एक छोटी-सी,
माटी की गुड़िया,
तुम ही प्राण मेरे,
तुम ही आत्मा हो॥२॥

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

बहुत रात बीती,
चलो मैं सुला दूँ।
पवन छेड़े सरगम,
मैं लोरी सुना दूँ।
हममऽऽ
हममऽऽ

बहुत रात बीती,
चलो मैं सुला दूँ।
पवन छेड़े सरगम,
मैं लोरी सुना दूँ।
तुम्हे देखकर ये,
ख्याल आ रहा है,
कि जैसे फ़रिश्ता,
कोई सो रहा हो॥३॥

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

शैलेन्द्र सिंह - तेरा मेरा प्यार अमर, फिर क्यों मुझको लगता है डर (लता)

गीतकार : शैलेन्द्र सिंह
राग :
चित्रपट : असली नकली (१९६२)
संगीतकार : शंकर जयकिशन
भाव : विमूढ़
गायन : लता मङ्गेश्कर
तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।
तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।
मेरे जीवनसाथी बता,
क्यों दिल धड़के रह-रह कर॥स्थायी॥

क्या कहा है चाँद ने,
जिसको सुन के चाँदनी,
हर लहर पे झूँम के,
क्यों ये नाचने लगी।

चाहत का है हरसूँ असर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर॥१॥

तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।

कह रहा है मेरा दिल,
अब ये रात ना ढले।
खुशियों को ये सिलसिला,
ऐसे ही चला चले।

तुझको देखूँ, देखूँ जिधर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर॥२॥

तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।

है शबाब पर उमंग,
हर खुशी जवान है।
मेरे दोनों बाहों में,
जैसे आसमान है।

चलती हूँ तारों पर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर॥३॥

तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।
मेरे जीवनसाथी बता,
क्यों दिल धड़के रह-रह कर।

हरिओम शरण - दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया, राम एक देवता पुजारी सारी दुनिया (हरिओम शरण)

गीतकार : हरिओम शरणराग :
गीतसंग्रह : दाता एक राम संगीतकार : हरिओम शरण
भाव : भजनगायन : हरिओम शरण
दाता एक राम दाता एक राम,
दाता एक राम।

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया,
पुजारी सारी दुनिया॥स्थायी॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम।

द्वारे पे उसके जाके कोई भी पुकारता,
द्वारे पे उसके जाके कोई भी पुकारता,
परम कृपा दे अपनी भव से उबारता,
परम कृपा दे अपनी भव से उबारता।

ऐसी दीनानाथ पे,
ऐसी दीनानाथ पे बलिहारी सारी दुनिया,
बलिहारी सारी दुनिया॥१॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम।

दो दिन का जीवन, प्राणी कर ले विचार तू,
कर ले विचार तू।
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू,
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू,
मन में निहार तू।

बिना हरि नाम के,
बिना हरि नाम के, दुखियारी सारी दुनिया,
दुखियारी सारी दुनिया॥२॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम।

नाम का प्रकाश जब अंदर जगायेगा,
नाम का प्रकाश जब अंदर जगायेगा,
प्यारे श्रीराम का तू दर्शन पायेगा,
प्यारे श्रीराम का तू दर्शन पायेगा।

ज्योति से जिसकी है,
ज्योति से जिसकी है, उजियारी सारी दुनिया,
उजियारी सारी दुनिया॥३॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, दाता एक राम,
दाता एक राम।

शैलेन्द्र सिंह - दिन ढ़ल जाये हाय रात ना जाय, तू तो ना आये तेरी याद सताय (रफ़ी)

गीतकार : शैलेन्द्र सिंहराग : खमाज
चित्रपट : गाईड (१९६५)संगीतकार : सचिनदेव बर्मन
भाव : विरहगायन : मोहम्मद रफ़ी
दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये॥स्थायी॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुये बदनाम।
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम।
अपने कभी थे, अब हैं पराए॥१॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात।
खुद से जुदा और जग से पराये,
हम दोनों थे साथ।
फिर-से वो सावन अब क्यों ना आये॥२॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर।
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर।
ऐसे में किसको कौन मनाए॥३॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।