हरिओम शरण - दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया, राम एक देवता पुजारी सारी दुनिया (हरिओम शरण)

गीतकार : हरिओम शरणराग :
गीतसंग्रह : दाता एक राम संगीतकार : हरिओम शरण
भाव : भजनगायन : हरिओम शरण
दाता एक राम दाता एक राम,
दाता एक राम।

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया,
पुजारी सारी दुनिया॥स्थायी॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम।

द्वारे पे उसके जाके कोई भी पुकारता,
द्वारे पे उसके जाके कोई भी पुकारता,
परम कृपा दे अपनी भव से उबारता,
परम कृपा दे अपनी भव से उबारता।

ऐसी दीनानाथ पे,
ऐसी दीनानाथ पे बलिहारी सारी दुनिया,
बलिहारी सारी दुनिया॥१॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम।

दो दिन का जीवन, प्राणी कर ले विचार तू,
कर ले विचार तू।
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू,
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू,
मन में निहार तू।

बिना हरि नाम के,
बिना हरि नाम के, दुखियारी सारी दुनिया,
दुखियारी सारी दुनिया॥२॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम।

नाम का प्रकाश जब अंदर जगायेगा,
नाम का प्रकाश जब अंदर जगायेगा,
प्यारे श्रीराम का तू दर्शन पायेगा,
प्यारे श्रीराम का तू दर्शन पायेगा।

ज्योति से जिसकी है,
ज्योति से जिसकी है, उजियारी सारी दुनिया,
उजियारी सारी दुनिया॥३॥

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया,
दाता एक राम, दाता एक राम,
दाता एक राम।

शैलेन्द्र सिंह - दिन ढ़ल जाये हाय रात ना जाय, तू तो ना आये तेरी याद सताय (रफ़ी)

गीतकार : शैलेन्द्र सिंहराग : खमाज
चित्रपट : गाईड (१९६५)संगीतकार : सचिनदेव बर्मन
भाव : विरहगायन : मोहम्मद रफ़ी
दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये॥स्थायी॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुये बदनाम।
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम।
अपने कभी थे, अब हैं पराए॥१॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात।
खुद से जुदा और जग से पराये,
हम दोनों थे साथ।
फिर-से वो सावन अब क्यों ना आये॥२॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर।
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर।
ऐसे में किसको कौन मनाए॥३॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।