शैलेन्द्र सिंह - दिन ढ़ल जाये हाय रात ना जाय, तू तो ना आये तेरी याद सताय (रफ़ी)

गीतकार : शैलेन्द्र सिंहराग : खमाज
चित्रपट : गाईड (१९६५)संगीतकार : सचिनदेव बर्मन
भाव : विरहगायन : मोहम्मद रफ़ी
दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये॥स्थायी॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

प्यार में जिनके सब जग छोड़ा,
और हुये बदनाम।
उनके ही हाथों हाल हुआ ये,
बैठे हैं दिल को थाम।
अपने कभी थे, अब हैं पराए॥१॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फुहारें,
ऐसी ही थी बरसात।
खुद से जुदा और जग से पराये,
हम दोनों थे साथ।
फिर-से वो सावन अब क्यों ना आये॥२॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।

दिल के मेरे पास हो इतने,
फिर भी हो कितने दूर।
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशान,
दोनों हैं मजबूर।
ऐसे में किसको कौन मनाए॥३॥

दिन ढ़ल जाये हाय, रात ना जाय,
तू तो ना आये तेरी याद सताये।
दिन ढ़ल जाये।




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