शैलेन्द्र सिंह - तेरा मेरा प्यार अमर, फिर क्यों मुझको लगता है डर (लता)

गीतकार : शैलेन्द्र सिंह
राग :
चित्रपट : असली नकली (१९६२)
संगीतकार : शंकर जयकिशन
भाव : विमूढ़
गायन : लता मङ्गेश्कर
तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।
तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।
मेरे जीवनसाथी बता,
क्यों दिल धड़के रह-रह कर॥स्थायी॥

क्या कहा है चाँद ने,
जिसको सुन के चाँदनी,
हर लहर पे झूँम के,
क्यों ये नाचने लगी।

चाहत का है हरसूँ असर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर॥१॥

तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।

कह रहा है मेरा दिल,
अब ये रात ना ढले।
खुशियों को ये सिलसिला,
ऐसे ही चला चले।

तुझको देखूँ, देखूँ जिधर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर॥२॥

तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।

है शबाब पर उमंग,
हर खुशी जवान है।
मेरे दोनों बाहों में,
जैसे आसमान है।

चलती हूँ तारों पर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर॥३॥

तेरा मेरा प्यार अमर,
फिर क्यों मुझको लगता है डर।
मेरे जीवनसाथी बता,
क्यों दिल धड़के रह-रह कर।




मेरे अन्य पसंदीदा गीत - भारतीय संगीत @ YouTube


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें