राजेन्द्र कृष्ण - तुम ही मेरे मंदिर, तुम ही मेरी पूजा (लता)

गीतकार : राजेन्द्र कृष्ण
राग : यमन
चित्रपट : खानदान (१९६५)
संगीतकार : रवि
भाव : समर्पण
गायन : लता मङ्गेश्कर
तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो॥स्थायी॥

कोई मेरी आँखों से,
देखे तो समझे,
कि तुम मेरे क्या हो,
कि तुम मेरे क्या हो।

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

जिधर देखती हूँ,
उधर तुम ही तुम हो।
ना जाने मगर,
किन ख्यालों में गुम हो।
जिधर देखती हूँ,
उधर तुम ही तुम हो।
ना जाने मगर,
किन ख्यालों में गुम हो।

मुझे देखकर तुम,
ज़रा मुस्कुरा दो,
नहीं तो मैं समझूँगी,
मुझसे ख़फ़ा हो॥१॥

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

तुम ही मेरी माथे की,
बिंदिया की झिलमिल।
तुम ही मेरे हाथों के,
गजरों के मंजिल।
तुम ही मेरी माथे की,
बिंदिया की झिलमिल।
तुम ही मेरे हाथों के,
गजरों के मंजिल।

मैं हूँ एक छोटी-सी,
माटी की गुड़िया,
तुम ही प्राण मेरे,
तुम ही आत्मा हो॥२॥

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

बहुत रात बीती,
चलो मैं सुला दूँ।
पवन छेड़े सरगम,
मैं लोरी सुना दूँ।
हममऽऽ
हममऽऽ

बहुत रात बीती,
चलो मैं सुला दूँ।
पवन छेड़े सरगम,
मैं लोरी सुना दूँ।
तुम्हे देखकर ये,
ख्याल आ रहा है,
कि जैसे फ़रिश्ता,
कोई सो रहा हो॥३॥

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।

तुम ही मेरे मंदिर,
तुम ही मेरी पूजा,
तुम ही देवता हो,
तुम ही देवता हो।




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