रविन्द्र जैन - जब दीप जले आना,जब शाम ढ़ले आना (येसुदास, हेमलता)

गीतकार : रविन्द्र जैनराग : यमन
चित्रपट : चित्चोर (१९७६)संगीतकार : रविन्द्र जैन
भाव : विरहगायन : येसुदास, हेमलता
आऽ

जब दीप जले आना,
जब शाम ढ़ले आना,
जब दीप जले आना,
जब शाम ढ़ले आना।

संकेत मिलन का भूल ना जाना,
मेरा प्यार ना बिसराना।
जब दीप जले आना,
जब शाम ढ़ले आना॥स्थायी॥

मैं पलकन डगर बुहारूँगा,
तेरी राह निहारूँगा,
मैं पलकन डगर बुहारूँगा,
तेरी राह निहारूँगा।

मेरी प्रीत का काजल तुम अपने,
नैनों में मले आना॥१॥

जब दीप जले आना,
जब शाम ढ़ले आना।

जहाँ पहली बार मिले थे हम,
जिस जगह से संग चले थे हम,
जहाँ पहली बार मिले थे हम,
जिस जगह से संग चले थे हम।

नदिया के किनारे आज उसी,
अमवा के तले आना।

नि रे ग, रे ग, म ग रे सा सा नि,
प प म, रे ग, सा नि सा ग प म प,

नित साँझ-सवेरे मिलते हैं,
आऽ नित साँझ-सवेरे मिलते हैं,
उन्हें देख के तारे खिलते हैं।
नित साँझ-सवेरे मिलते हैं,
उन्हें देख के तारे खिलते हैं।

लेते हैं विदा एक-दूजे से,
कहते हैं चले आना॥३॥

जब दीप जले आना,
जब शाम ढ़ले आना।




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