आनंद बक्शी - चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी तारे निकल पड़े (आशा, हेमलता, उशा)

गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : जीने की राह (१९६९)संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
भाव : आसगायन : आशा भोंसले, हेमलता, उशा मङ्केश्कर
चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े,
चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े,

गलियों में वो नसीब के,
मारे निकल पड़े॥स्थायी॥

चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े।

उनकी नजर का जिसने,
नजारा चुरा लिया,
उनके दिलों का जिसने,
सहारा चुरा लिया।

उस चोर की तलाश में,
सारे निकल पड़े॥१॥

चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े।

ग़म की अँधेरी रात में,
जलना पड़ा उन्हें,
फूलों के बदले कांटों पे,
चलना पड़ा उन्हें।

धरती पे जब गगन के,
दुलारे निकाल पड़े॥२॥

चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े।

उनकी पुकार सुनके,
ये दिल डगमगा गया,
हमको भी कोई बिछड़ा,
हुआ याद गया।

भर आयी आँख, आँसू
हमारे निकल पड़े।

चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े,
गलियों में जो नसीब के,
मारे निकल पड़े।

चंदा को ढ़ूँढ़ने सभी,
तारे निकल पड़े।




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