मजरूह सुल्तानपुरी - कोई हमदम ना रहा, कोई सहारा ना रहा (किशोर)

गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरी
राग : झिञ्झोटी
चित्रपट : झुमरू (१९६१)
संगीतकार : किशोर कुमार
भाव : दुःख
गायन : किशोर कुमार

कोई हमदम ना रहा,
कोई सहारा ना रहा।
हम किसी के ना रहे,
कोई हमारा ना रहा॥स्थायी॥

कोई हमदम ना रहा,
कोई सहारा ना रहा।

शाम तनहायी की है,
आयेगी मंज़िल कैसे।
शाम तनहायी की है,
आयेगी मंज़िल कैसे।

जो मुझे राह दिखाये,
वो ही तारा ना रहा॥१॥

कोई हमदम ना रहा,
कोई सहारा ना रहा।

ऐ नज़ारों ना हँसो,
मिल ना सकूँगा तुमसे।
ऐ नज़ारों ना हँसो,
मिल ना सकूँगा तुमसे।

वो मेरे हो ना सके,
मैं भी तुम्हारा ना रहा॥२॥

कोई हमदम ना रहा,
कोई सहारा ना रहा।

क्या बताऊँ मैं कहाँ,
यूँ ही चला जाता हूँ।
क्या बताऊँ मैं कहाँ,
यूँ ही चला जाता हूँ।

जो मुझे फिर से बुला ले,
वो इशारा ना रहा॥३॥

कोई हमदम ना रहा,
कोई सहारा ना रहा।
हम किसी के ना रहे,
कोई हमारा ना रहा॥





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