भरत व्यास - ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हों हमारे करम (लता)

गीतकार : भरत व्यासराग :
चित्रपट : दो आँखें बारह हाथ (१९५८)संगीतकार : वसंत देसाई
भाव : प्रार्थनागायन : लता मङ्केश्कर
ऐ मालिक तेरे बंदे हम,
ऐसे हों हमारे करम,
नेकी पर चले और बदी से टले,
ताकि हँसते हुए निकले दम॥स्थायी॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम।

ये अँधेरा घना छा रहा,
तेरा इंसान घबरा रहा।
हो रहा बेखबर, कुछ-ना आता नज़र,
सुख का सूरज छुपा जा रहा।

है तेरी रोशनी में जो दम,
तू अमावस को कर दे पूनम,
नेकी पर चले और बदी से टले,
ताकि हँसते हुए निकले दम॥१॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम।

जब जुल्मों का हो सामना,
तब तू ही हमें थामना।
वो बुराई करें, हम भलाई करें,
नहीं बदले की हो कामना।

बढ उठे प्यार का हर कदम,
और मिटे बैर का ये भरम।
नेकी पर चले और बदी से टले,
ताकि हँसते हुए निकले दम॥२॥

ऐ मालिक तेरे बंदे हम।




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