हसरत जयपुरी - ऐहसान तेरा होगा मुझपर, दिल चाहता है वो कहने दो (रफ़ी)

गीतकार : हसरत जयपुरीराग : यमन कल्याण
चित्रपट : जंगली (१९६१)संगीतकार : शंकर जयकिशन
भाव : समर्पणगायन : मोहम्मद रफ़ी
ऐहसान तेरा होगा मुझपर,
दिल चाहता है वो कहने दो,
मुझे तुमसे मुहब्बत हो गई है,
मुझे पलकों की छाँव में रहने दो॥स्थायी॥

ऐहसान तेरा होगा मुझपर,
दिल चाहता है वो कहने दो,
मुझे तुमसे मुहब्बत हो गई है,
मुझे पलकों की छाँव में रहने दो।
ऐहसान तेरा होगा मुझपर।

तुमने मुझको हँसना सिखाया,ओऽ
तुमने मुझको हँसना सिखाया,
रोने कहोगे रो लेंगे अब,
रोने कहोगे रो लेंगे।

आँसू का हमारे ग़म ना करो,
वो बहते तो बहने दो,
मुझे तुमसे मुहब्बत हो गई है,
मुझे पलकों की छाँव में रहने दो॥१॥

ऐहसान तेरा होगा मुझपर।

चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,
चाहे बना दो, चाहे मिटा दो,
मर भी गये तो देंगे दुआयें,
मर भी गये तो देंगे दुआयें।

उड़-उड़ के कहेंगी ख़ाक सनम,
ये दर्द-ए-मुहब्बत सहने दो,
मुझे तुमसे मुहब्बत हो गई है,
मुझे पलकों की छाँव में रहने दो॥२॥

ऐहसान तेरा होगा मुझपर,
दिल चाहता है वो कहने दो,
मुझे तुमसे मुहब्बत हो गई है,
मुझे पलकों की छाँव में रहने दो।

ऐहसान तेरा होगा मुझपर।




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