मजरूह सुल्तानपुरी - कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार, जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेकरार (मुकेश, लता)


गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरीराग :
चित्रपट : फिर कब मिलोगी (१९७४) संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
भाव : आस गायन : मुकेश, लता मङ्गेश्कर

कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार,
जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेकरार॥स्थायी॥

कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार,
जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेकरार।

दूर जुल्फों की छाँव से,
कहता हूँ हवाओं से,
उसी बुत के अदाओं के,
अफसाने हजार।

वो जो बाहों में मचल जाती,
हसरत ही निकल जाती,
मेरी दुनिया बदल जाती,
मिल जाता करार॥१॥


कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार,
जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेकरार।

आऽ
हे अरमां है कोई पास आये,
इन हाथों में वो हाथ आये,
फिर ख्वाबों की घटा छाये,
बरसाये खुमार।

फिर उन्हीं दिन-रातों पे,
मतवाली मुलाकातों पे,
उल्फत भरी बातों पे,
हम होते निसार॥२॥

कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार,
जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेकरार,
जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेकरार।