आनंद बक्शी - ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जाए, मुझे डोर कोई खींचे, तेरी ओर लिए जाए (किशोर)

गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : कटी पतंग (१९७१)संगीतकार :राहुलदेव बर्मन
भाव : शिकायतगायन : किशोर कुमार

हेऽ हमम्ऽ
ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय॥स्थायी॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

दूर रहती है तू,
मेरे पास आती नहीं,
होंठों पे तेरे
कभी प्यास आती नहीं।
ऐसा लगे जैसे कि तू,
हँस के जहर कोई पीए जाए॥१॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

बात जब मैं करूँ,
मुझे रोक देती है क्यों,
तेरी मीठी नजर
मुझे टोक देती है क्यों।
तेरी हया, तेरी शरम,
तेरी कसम मेरे होंठ सीये जाए॥२॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

एक रूठी हुई
तकदीर जैसे कोई,
खामोश ऐसे है तू
तसवीर जैसे कोई।
तेरी नजर बनके जुबां,
लेकिन तेरे पैगाम दिए जाय॥३॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

हसरत जयपुरी - मुझको अपने गले लगा लो ऐ मेरे हमराही , तुमको क्या बतलाऊँ मैं कि तुमसे कितना प्यार है (रफ़ी, मुबारक बेगम)

गीतकार : हसरत जयपुरीराग :
चित्रपट : हमराही (१९६३) संगीतकार : शंकर जयकिशन
भाव : प्रेम गायन : मोहम्मद रफ़ी, मुबारक बेगम
(मुबारक बेगम)
मुझको अपने गले लगा लो
ऐ मेरे हमराही

मुझको अपने गले लगा लो
ऐ मेरे हमराही
तुमको क्या बतलाऊँ मैं
कि तुमसे कितना प्यार है

(रफ़ी)
मुझको अपने गले लगा लो
ऐ मेरे हमराही
तुमको क्या बतलाऊँ मैं
कि तुमसे कितना प्यार है

मुझको अपने गले लगा लो

(मुबारक बेगम)
जब तुम मुझसे दूर रहते हो
जिया मेरा घबराता है
नींद आँखों से उड़ जाती है
चाँद अगन बरसाता है

दोनो पहलू जल जाते है
आग में लाग लगाता है
जैसे तड़पे बिन जल मछली
प्यार मुझे तड़पाता है
प्यार मुझे तड़पाता है

इस उलझन से मुझको बचा लो
ऐ मेरे हमराही
तुमको क्या बतलाऊँ मैं
कि तुमसे कितना प्यार है॥१॥

(रफ़ी)
मुझको अपने गले लगा लो
ऐ मेरे हमराही
तुमको क्या बतलाऊँ मैं
कि तुमसे कितना प्यार है

मुझको अपने गले लगा लो

जिन राहों पर हँस के चलो तुम
फूल वहाँ खिल जाते हैं
दम लेने को जहाँ रूको तुम
मधुशाले बन जाते हैं

तुमको छू कर पवन झकोरे
 खुशबू लेकर जाते हैं
लेकिन हम तो देख के सूरत
दिल थामे रह जाते हैं
दिल थामे रह जाते हैं

दिल से दिल के तार मिला लो
ऐ मेरे हमराही
तुमको क्या बतलाऊँ मैं
कि तुमसे कितना प्यार है

मुझको अपने गले लगा लो

शकील बदायुनी - तू गंगा की मौज, मैं जमुना का धारा, हो रहेगा मिलन ये हमारा तुम्हारा (रफ़ी, लता)

गीतकार : शकील बदायुनीराग :
चित्रपट : बैजू बावरा (१९५२) संगीतकार : नौशाद
भाव : विमूढ़ गायन : मोहम्मद रफ़ी, लता मङ्केश्कर
हो जी ओऽ
तू गंगा की मौज, मैं
जमुना का धारा
तू गंगा की मौज, मैं
जमुना का धारा
 हो रहेगा मिलन ये हमारा,
होऽ हमारा तुम्हारा रहेगा मिलन
ये हमारा तुम्हारा ॥मुखड़ा॥

अगर तू है सागर तो
मझदार मैं हूँ,  मझदार मैं हूँ
तेरे दिल की कश्ती का
पतवार मैं हूँ, पतवार मैं हूँ

चलेगी अकेले ना तुमसे ये नैया,
ना तुमसे ये नैया,
मिलेगी ना मंजिल तुम्हें बिन खेवैया
तुम्हें बिन खेवैया

चले आओ जी, चले आओ जी
चले आओ मौजों का लेकर सहारा
हो रहेगा मिलन ये हमारा तुम्हारा ॥१॥

भला कैसे टूटेंगे बंधन ये दिल के
बंधन ये दिल के
बिछड़ती नहीं मौज से मौज मिलके
दो मौज मिलके

डूबोगे भँवर में तो डूबने ना देंगे
डूबने ना देंगे
डूबो देंगे नैया तुम्हें ढ़ूँढ़ लेंगे
तुम्हें ढ़ूँढ़ लेंगे

बनायेंगे हम बनायेंगे हम
बनायेंगे तूफाँ को एक दिन किनारा
हो रहेगा मिलन ये हमारा तुम्हारा ॥२॥

तू गंगा की मौज, मैं
जमुना का धारा
तू गंगा की मौज, मैं
जमुना का धारा
 हो रहेगा मिलन ये हमारा,
होऽ हमारा तुम्हारा रहेगा मिलन
ये हमारा तुम्हारा

तू गंगा की मौज, मैं
जमुना का धारा
हो रहेगा मिलन ये हमारा तुम्हारा।


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साहिर लुधियान्वी - किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई, मिलों है ख़ामोशी, बरसों है तनहाई (किशोर कुमार)

गीतकार : साहिर लुधियान्वीराग :
चित्रपट : जोशीला (१९७३)संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
भाव :  रोषगायन : किशोर कुमार

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई,
मिलों है ख़ामोशी, बरसों है तनहाई।
भूली दुनिया कभी की, तुझे भी, मुझे भी,
फिर क्यों आँख भर आई॥स्थायी॥

किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई।
 कोई भी साया नहीं राहों में,
कोई भी आयेगा ना बाहों में,
तेरे लिए, मेरे लिए, कोई नहीं रोनेवाला ओ।
झूठा भी नाता नहीं चाहों में,
तू ही क्यों डूबा रहे आहों में,
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला।
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में, बाँटे पीर परायी॥१॥

हो किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई।

तुझे क्या बीती हुई रातों से,
मुझे क्या खोई हुई बातों से,
सेज नहीं चिता सही, जो भी मिले सोना होगा ओ।
गई जो डोरी छूटी हाथों से,
लेना क्या टूटे हुए साथों से,
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा।
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई॥२॥

 हो किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई।
हमम्ऽ

राजेन्द्र कृष्ण - जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, वो भारत देश है मेरा (रफ़ी)

गीतकार : राजेन्द्र कृष्णराग :
चित्रपट : सिकन्दर-ए-आज़म (१९६५) संगीतकार : हँसराज बहल
भाव : देशप्रेम गायन : मोहम्मद रफ़ी
गुरू ब्रह्मा गुरूर्विष्णु गुरूदेव महेश्वरा।
गुरू साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः॥

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा
जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा

जहाँ सत्य-अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा

जय भारती, जय भारती, जय भारती, जय भारती॥मुखड़ा॥

आऽ आऽ
ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला
हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा एक-एक बाला
और राधा एक-एक बाला

जहाँ सूरज सबसे पहले आकर डाले अपना डेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा॥१॥

जहाँ गंगा जमुना कृष्ण औऱ कावेरी बहती जाये
जहाँ उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम को अमृत पिलवाये
ये अमृत पिलवाये

कहीं ये फल और फूल उगाये, केसर कहीं बिखेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा॥२॥

अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले
कहीं दिवाली की जगमग है होली के कहीं मेले
होली के कहीं मेले
कहीं दिवाली की जगमग है होली के कहीं मेले
होली के कहीं मेले

जहाँ राग-रंग और हँसी-खुशी का चारों ओर है डेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा॥३॥

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा

आऽ आऽ आऽ आऽ आऽ
जहाँ आसमान से बातें करते मंदिर औऱ शिवाले
किसी नगर में किसी द्वार पर कोई ना ताला डाले
कोई ना ताला डाले

औऱ प्रेम की बंसी जहाँ बजाता आये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा

जहाँ सत्य-अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा

जय भारती, जय भारती, जय भारती, जय भारती।

आऽ आऽ आऽ

राजेन्द्र कृष्ण - कौन आया मेरे मन के द्वारे, पायल की झंकार लिये (मन्ना डे)

गीतकार : राजेन्द्र कृष्णराग :
चित्रपट : देख कबीरा रोया (१९५७)संगीतकार : मदन मोहन
भाव :  प्रेमगायन : मन्ना डे

कौन आया मेरे मन के द्वारे,
पायल की झंकार लिये,
कौन आया मेरे मन के द्वारे,
पायल की झंकार लिये,
कौन आया॥स्थायी॥

आँख ना जाने, दिल पहचाने,
आँख ना जाने, दिल पहचाने,
सूरतिया कुछ ऐसी।
आँख ना जाने, दिल पहचाने,

सूरतिया कुछ ऐसी।

याद करूँ तो याद ना आये,
मूरतिया ये कैसी।
पागल मनवा सोच में डूबा,
सपनों का संसार लिये॥१॥

कौन आया मेरे मन के द्वारे,
पायल की झंकार लिये,
कौन आया।

इक पल सोंचूँ मेरी आशा,
रूप बदल कर आयी,
इक पल सोंचूँ मेरी आशा,
रूप बदल कर आयी,

दूजे पल फिर ध्यान ये आये,
हो ना कहीं परछाई।
जो परदेसी के घर आयी
एक अनोखा प्यार लिये॥२॥

कौन आया मेरे मन के द्वारे,
पायल की झंकार लिये,
कौन आया।

आनंद बक्शी - नफरत की दुनिया को छोड़ के प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार (रफ़ी)


गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : हाथी मेरे साथी संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
भाव : विरह गायन : मोहम्मद रफ़ी
नफरत की दुनिया को छोड़ के
खुश रहना मेरे यार

नफरत की दुनिया को छोड़ के
प्यार की दुनिया में
खुश रहना मेरे यार॥स्थायी॥

नफरत की दुनिया को छोड़ के
प्यार की दुनिया में
खुश रहना मेरे यार

इस झूठ की नगरी से तोड़ के
नाता जा प्यारे
अमर रहे तेरा प्यार
खुश रहना मेरे यार

जब जानवर कोई इंसान को मारे
जब जानवर कोई इंसान को मारे
कहते हैं दुनिया में वहशी उसे सारे
एक जानवार की जान इंसानो ने ली है
चुप क्यों है संसार, खुश रहना मेरे यार॥१॥

बस आखिरी सुन ले ये मेल है अपना
बस आखिरी सुन ले ये मेल है अपना
बस खत्म ऐ साथी ये खेल है अपना
अब याद में तेरी बीत जायेंगे रो-रोके
जीवन के दिन चार, खुश रहना मेरे यार॥२॥

आनंद बक्शी - तेरो नैनों के मैं दीप जलाऊँगा, अपनी आँखों से दुनिया दिखलाऊँगा (रफी, लता)

गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : अनुराग (१९७२) संगीतकार : सचिनदेव बर्मन
भाव : प्रेम गायन : मोहम्मद रफ़ी, लता मङ्गेश्कर
तेरो नैनों के मैं दीप जलाऊँगा,
तेरो नैनों के मैं दीप जलाऊँगा,
अपनी आँखों से दुनिया दिखलाऊँगा।

अच्छा?
वो क्या है? एक मंदिर है,
उस मंदिर में? एक मूरत है,
ये मूरत कैसी होती है?
तेरी सूरत जैसी होती है॥१॥

वो क्या है? एक मंदिर है।

मैं क्या जानूँ छाँव है क्या और धूप है क्या,
मैं क्या जानूँ छाँव है क्या और धूप है क्या,
रंग-बिरंगी इस दुनिया का रूप है क्या।

वो क्या है? एक परबत है,
उस परबत पे? एक बादल है,
ये बादल कैसा होता है?
तेरे आँचल जैसा होता है॥२॥

वो क्या है? एक परबत है।

मस्त हवा ने घूँघट खोला कलियों का,
मस्त हवा ने घूँघट खोला कलियों का,
झूम के मौसम आया है रंग-रलियों का।

वो क्या है? एक बगिया है,
उस बगिया में? कई भँवरे हैं,
भँवरे क्या जोगी होते हैं?
नहीं दिल के रोगी होते हैं॥३॥

वो क्या है? एक बगिया है।

ऐसी भी अंजान नहीं मैं अब सजना,
बिन देखे मुझको दिखता है सब सजना।

अच्छा?
वो क्या है? वो सागर है,
उस सागर में? एक नैया है।
अरे तूने कैसे नाम लिया?
मन-से आँखों का काम लिया॥४॥

वो क्या है? वो सागर है।
हममऽ

रविन्द्र जैन - आज से पहले आज से ज्यादा खुशी आज तक नहीं मिली (येसुदास)


गीतकार : रविन्द्र जैनराग :
चित्रपट : चित्चोर (१९७६)संगीतकार : रविन्द्र जैन
भाव : परमानंदगायन : येसुदास

आज से पहले, आज से ज्यादा,
आज से पहले, आज से ज्यादा,
खुशी आज तक नहीं मिली।

इतनी सुहानी, ऐसी मीठी,
इतनी सुहानी, ऐसी मीठी,
घड़ी आज तक नहीं मिली॥स्थायी॥

आज से पहले।

इसको संयोग कहें या किस्मत का लेखा,
हम जो अचानक मिले हैं।

हेऽ इसको संयोग कहें या किस्मत का लेखा,
हम जो अचानक मिले हैं।

मनचाहे साथी पाके हम सबके चेहरे,
देखो तो कैसे खिले हैं।

होऽ तकदीरों को जोड़ दे ऐसी,
इन तकदीरों को जोड़ दे ऐसी,
कड़ी आज तक नहीं मिली॥१॥

आज से पहले।

सपना हो जाए वो पूरा, जो हमने देखा,
ये मेरे दिल की दुआ है।

हेऽ सपना हो जाए वो पूरा, जो हमने देखा,
ये मेरे दिल की दुआ है।

ये पल जो बीत रहे हैं, इनके नशे में,
दिल मेरा गाने लगा है।

होऽ इसी खुशी को ढ़ूँढ़ रहे थे,
हम इसी खुशी को ढ़ूँढ़ रहे थे,
यही आज तक नहीं मिली॥२॥


आज से पहले, आज से ज्यादा,
खुशी आज तक नहीं मिली।


आज से पहले।

०ऽऽऽ

राजा मेहदी अली खान - सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा, सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा (आशा)

गीतकार : राजा मेहदी अली खानराग :
चित्रपट : भाई बहन (१९५९) संगीतकार : दत्ता नायक
भाव : देशप्रेम गायन : आशा भोंसले
सारे जहाँ से अच्छा,
हिन्दोस्तां हमारा,
सारे जहाँ से अच्छा,
हिन्दोस्तां हमारा,

हम बुलबुले हैं इसकी,
ये गुलसितां हमारा॥स्थायी॥
सारे जहाँ से अच्छा,
हिन्दोस्तां हमारा।

परबत है इसके ऊँचे,
प्यारी हैं इसकी नदियाँ।
हममऽ
परबत है इसके ऊँचे,
प्यारी हैं इसकी नदियाँ।

आकाश में इसी की,
गुजरी हजारों सदियाँ,
गुजरी हजारों सदियाँ।

हँसता है बिजलियों पर,
ये आशियां हमारा,

हम बुलबुले हैं इसकी,
ये गुलसितां हमारा॥१॥


वीरान कर दिया था,
आँधी ने इस चमन को।
आऽ
वीरान कर दिया था,
आँधी ने इस चमन को।

देकर लहू बचाया,
गाँधी ने इस चमन को,
गाँधी ने इस चमन को।

रक्षा करेगा इसकी,
हर नौंजवां हमारा,
हम बुलबुले हैं इसकी,
ये गुलसितां हमारा॥२॥


सारे जहाँ से अच्छा,
हिन्दोस्तां हमारा।

शकील बदायुन - मोहे भूल गये साँवरिया, भूल गये साँवरिया (लता)

गीतकार : शकील बदायुनीराग :
चित्रपट : बैजु बावरा (१९५२) संगीतकार : नौशाद
भाव : विरह गायन : लता मङ्गेश्कर
जो मैं ऐसा जानती,
कि प्रीत किये दुःख होय,
हो नगर ढ़िंढ़ोरा पिटती,
कि प्रीत ना करियो कोय॥अलाप॥

मोहे भूल गये साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।

मोहे भूल गये साँवरिया,
भूल गये साँवरिया।

आवन कह गये, अजहुं ना आये,
आवन कह गये, अजहुं ना आये,
लीनी ना मोरी खबरिया॥स्थायी॥


मोहे भूल गये  साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।

दिल को दिये दुःख बिरहा के,
तोड़ दिया क्यों महल बना के।

दिल को दिये दुःख बिरहा के,
तोड़ दिया क्यों महल बना के।


आस दिला के, ओ बेदर्दी
आस दिला के, ओ बेदर्दी
फेर ली काहे नजरिया॥१॥


मोहे भूल गये साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।

नैन कहे रो-रो के सजना,
देख चुके हम प्यार का सपना।



नैन कहे रो-रो के सजना,
देख चुके हम प्यार का सपना।



प्रीत है झूठी, प्रीतम झूठा,
झूठी है सारी नगरिया॥२॥


मोहे भूल गये  साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।




शैलेन्द्र सिंह - ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना (मुकेश)

गीतकार : शैलेन्द्र सिंहराग : जोग
चित्रपट : बंदिनीसंगीतकार : सचिनदेव बर्मन
भाव : विदायीगायन : मुकेश
ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना,
ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना,
ये खाट, तू ये बाट कहीं भूल ना जाना,
ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना॥स्थायी॥

बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे,
बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे,
ढूँढेंगे तुझे गली-गली सब ये गम के मारे,
पूछेगी हर निगाह कल तेरा ठिकाना॥१॥

ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना।

दे-दे के ये आवाज कोई हर घड़ी बुलाये,
दे-दे के ये आवाज कोई हर घड़ी बुलाये,
फिर जाये जो उस पार कभी लौट के ना आये,
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो बताना॥२॥

ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना,
ये खाट, तू ये बाट कहीं भूल ना जाना।

ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना।

साहिर लुधियानवी - आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया (महेन्द्र कपूर)


गीतकार : साहिर लुधियानवीराग :
चित्रपट : गुमराह (१९६३)संगीतकार : रवि
भाव : रोषगायन : महेन्द्र कपूर
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया॥स्थायी॥

आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था,
शोख नजरों-सी मुहब्बत का सलाम आया था।

उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था,
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था,
आपको देख के वो अहदे वफा याद आया॥१॥

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

रूह में जल उठे बुझती हुयी यादों के दिये,
कैसे दिवाने थे हम आपको पाने के लिये।

यूँ तो कुछ कम नहीं आपने ऐहसान किये,
यूँ तो कुछ कम नहीं आपने ऐहसान किये,
पर जो मांगे से ना पाया वो सिला याद आया॥२॥

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है,
मेरे हिस्से में ये हल्की-सी मुलाकात तो है।

गैर का होके भी ये हुस्न मेरे साथ तो है,
गैर का होके भी ये हुस्न मेरे साथ तो है,
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया॥३॥

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

आनंद बक्शी - डोली में बिठाई के कहार, लाये मोहे सजना के द्वार (बर्मन दा)

गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : अमर प्रेम (१९७१)संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
भाव : रोषगायन : सचिनदेव बर्मन
हो रामा रे हो रामा

डोली में बिठाई के कहार,
लाये मोहे सजना के द्वार।
बिते दिन खुशियों के चार,
देखे दुख मन को हजार।

मर के निकलना था घर से सँवरिया के,
जिते-जी निकलना पड़ा।
फूलों जैसे पावों में पड़ गए छाले,
काँटों पे जो चलना पड़ा।
बन गई पतझर बैरन बहार।

जितने हैं आँसू मेरी अँखियों में उतना,
नदिया में नाहि रे नीर।
ओ लिखने वाले तूने लिखी दी ये कैसी मेरी,
टूटी नैया जैसी तकदीर।
रूठा माँझी टूटे पतवार।

टूटा पहले मनवा में, चूड़ियाँ टूटीं,
हुए सारे सपने यूँ चूर।
कैसा हुआ धोखा आया, पवन को झोंका,
मिट गया मेरा सिंदूर।
लूट गए मेरे सोलह श्रींगार।