गीत साँचा

गीतकार का नाम - गीत का दीर्घ शीर्षक, दो पंक्ति (गायन)
गीतकार : गीतकार का पूर्ण नाम
राग : हिन्दुस्तानी या कर्नाटिक राग
चित्रपट (वर्ष) : चित्रपट का नाम और वर्ष
संगीतकार : संगीतकार का पूर्ण नाम
भाव : भाव जिसमें गीत रचा गया है
गायन : गायक और गायिका का पूर्ण नाम
गीत का लेख
स्थायी पंक्तियाँ शुरू में आती हैं॥स्थायी॥

अंतरा की गिनती उसके अंत में
छोटी-छोटी पंक्तियाँ
अच्छी हैं
पढ़ने में भी और गाने में भी॥१॥

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सुगम संगीत गीत संग्रह

पुराने गीतों से मेरा शुरू से लगाव रहा है। हिन्दी में लिखे गीत कई बार नहीं मिलते या उनकी पूरी जानकारी नहीं मिलती। इसके लिए मैंने मेरे मनपसंद गीतों के बोल लिखना शुरू किया है जिससे अन्य भी इसे पढ सकें और इस जानकारी का लाभ उठाएँ।
  • १) कूटशब्द : क्योंकि ये सीमीत हैं, अतः इस क्रम में - गीतकार, राग, संगीतकार, गायिका, गायक, भाव 
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शैलेन्द्र - तू प्यार का सागर है, तेरी एक बूँद के प्यासे हम (मन्ना डे)


गीतकार : शैलेन्द्रराग :
चित्रपट : सीमा (१९५५) संगीतकार : शंकर जयकिशन
भाव : प्रार्थना गायन : मन्ना डे
तू प्यार का सागर है,
तू प्यार का सागर है,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम।

लौटा जो दिया तूने,
लौटा जो दिया तूने,
चले जायेंगे जहाँ से हम,
चले जायेंगे जहाँ से हम॥स्थायी॥

तू प्यार का सागर है,
तू प्यार का सागर है,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम।

तू प्यार का सागर है।

हममऽ

घायल मन का पागल पंछी,
उड़ने को बेकरार, उड़ने को बेकरार।
पंख है कोमल, आँख है धुँधली,
जाना है सागर पार, जाना है सागर पार।

अब तू ही इसे समझा,
अब तू ही इसे समझा,
राह भूले थे कहाँ से हम,
राह भूले थे कहाँ से हम॥१॥

तू प्यार का सागर है,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम,तेरी एक बूँद के प्यासे हम।

तू प्यार का सागर है।

हममऽ

ईधर झूम के गाये जिन्दगी,
उधर है मौत खड़ी, उधर है मौत खड़ी।
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा,
उलझन आन पड़ी, उलझन आन पड़ी।

कानों में जरा कह दे,
कानों में जरा कह दे,
कि आयें कौन दिशा से हम,
कि आयें कौन दिशा से हम।

तू प्यार का सागर है,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम,तेरी एक बूँद के प्यासे हम।

तू प्यार का सागर है,
तू प्यार का सागर है।

आनंद बक्शी - जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा, उस गली से हमें तो गुजरना नहीं (मुकेश)


गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : कटी पतंग (१९७१) संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
भाव : समर्पण गायन : मुकेश
जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा,
उस गली से हमें तो गुजरना नहीं।
जो डगर तेरे द्वारे पे जाती न हो,
उस डगर पे हमें पाँव रखना नहीं॥स्थायी॥

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा।

जिन्दगी में कई रंग-रलियाँ सहीं,
हर तरफ मुस्कुराती ये कलियाँ सहीं,
जिन्दगी में कई रंग-रलियाँ सहीं,
हर तरफ मुस्कुराती ये कलियाँ सहीं,
खूबसूरत बहारों की गलियाँ सहीं।

जिस चमन में तेरे पग में काँटे चुभे,
जिस चमन में तेरे पग में काँटे चुभे,
उस चमन से हमें फूल चुनना नहीं॥१॥

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा।

हाँ ये रसमें ये कसमें सभी तोड़ के,
तू चली आ चुनर प्यार की ओढ़ के,
हाँ ये रसमें ये कसमें सभी तोड़ के,
तू चली आ चुनर प्यार की ओढ़ के,
या चला जाऊँगा मैं ये जग छोड़ के।

जिस जगह याद तेरी सताने लगे,
जिस जगह याद तेरी सताने लगे,
उस जगह एक पल भी ठहरना नहीं॥२॥

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा,
उस गली से हमें तो गुजरना नहीं।
जो डगर तेरे द्वारे पे जाती न हो,
उस डगर पे हमें पाँव रखना नहीं।

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा।

साहिर लुधियान्वी - अभी ना जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं (रफ़ी, आशा)

गीतकार : साहिर लुधियान्वीराग :
चित्रपट : हम दोनो (१९६१)संगीतकार : जयदेव
भाव : प्रेमगायन : मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले

(रफ़ी)
अभी ना जाओ छोड़ कर,
कि दिल अभी भरा नहीं॥स्थायी॥

अभी-अभी तो आई हो,
बहार बन के छाई हो,
हवा ज़रा महक तो ले,
नजर ज़रा बहक तो ले,
ये शाम ढल तो ले ज़रा,
ये दिल सँभल तो ले ज़रा,
मैं थोड़ी देर जी तो लूँ,
नशे की घूँट पी तो लूँ,
अभी तो कुछ कहा नहीं,
अभी तो कुछ सुना नहीं॥१॥

अभी ना जाओ छोड़ कर,
कि दिल अभी भरा नहीं।

(आशा)
सितारे झिलमिला उठे,
चिराग जगमगा उठे,
बस अब ना मुझको टोकना,
ना बढ के राह रोकना,
अगर मैं रूक गई अभी,
तो जा ना पाऊँगी कभी,
यही कहोगे तुम सदा,
कि दिल अभी भरा नहीं,
जो खत्म हो किसी जगह,
ये ऐसा सिलसिला नहीं ॥२॥

अभी नहीं अभी नहीं,
नहीं नहीं नहीं नहीं।

अभी ना जाओ छोड़ कर,
कि दिल अभी भरा नहीं।

(रफ़ी)
अधूरी आस छोड़ के,
अधूरी प्यास छोड़ के,
जो रोज़ यूँ ही जाओगी,
तो किस तरह निभाओगी,
कि जिन्दगी की राह में,
जवाँ दिलों की चाह में,
कई मकाम आएँगे,
जो हमको आज़माएँगे,
बुरा ना बात का,
ये प्यार है गिला नहीं।

हाँ, यही कहोगे तुम सदा
कि दिल अभी भरा नहीं
हाँ दिल अभी भरा नहीं
नहीं, नहीं, नहीं, नहीं।


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चिट्ठी आई है, वतन से चिट्ठी आई है...

चिट्ठी आई है, चिट्ठी आई है,
चिट्ठी आई है, वतन से चिट्ठी आई है।
बड़े दिनों के बाद, हम बेवतनो को याद,
वतन की मिट्टी आई है।

ऊपर मेरा नाम लिखा है,
अंदर ये पैगाम लिखा है,
ओ परदेस को जाने वाले,
लौट के फिर ना आने वाले,
सात समंदर पार गया तू,
हमको जिंदा मार गया तू,
खून के रिश्ते तोड़ गया तू,
आँख में आँसू छोड़ गया तू।
कम खाते हैं, कम सोते हैं,
बहुत ज्यादा हम रोते हैं।

सूनी हो गई शहर की गलियाँ,
काँटे बन गयी बाग की कलियाँ,
कहते हैं सावन के झूले,
भूल गया तू हम नहीं भूले।
तेरे बिन जब आई दिवाली,
दिप नहीं दिल जले है खाली,
तेरे बिन जब आई होली,
पिचकारी से छूटी गोली।
पीपल सूना, पनघट सूना,
घर शमशान का बना नमूना,
फसल कटी आई बैसाखी,
तेरा आना रह गया बाकी।

पहले जब तू खत लिखता था,
कागज में चेहरा दिखता था,
बंद हुआ ये मेल भी अब तो,
खत्म हुआ ये खेल भी अब तो।
डोली में जब बैठी बहना,
रस्ता देख रहे थे नैना।
मैं तो बाप हूँ मेरा क्या है,
तेरी माँ का हाल बुरा है,
तेरी बीवी करती है सेवा,
सूरत से लगती है बेवा।
तूने पैसा बहुत कमाया,
इस पैसे ने देस छुड़ाया।
देस पराया छोड़ के आ जा,
पंछी पिंजड़ा तोड़ के आ जा,
आ जा उम्र बहुत है छोटी,
अपने घर में भी है रोटी।

प्रेम धवन - ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझपे दिल कुर्बान (मन्ना डे)

गीतकार : प्रेम धवनराग :
चित्रपट : काबुलीवाला (१९६१) संगीतकार : सलिल चौधरी
भाव : देशप्रेम गायन : मन्ना डे
ऐ मेरे प्यारे वतन,
ऐ मेरे बिछड़े चमन,
तुझपे दिल कुर्बान।
तू ही मेरी आरज़ू,
तू ही मेरी आबरू,
तू ही मेरी जाँ॥स्थायी॥

तेरे दामन से जो आए,
उन हवाओं को सलाम।
चूम लूँ मैं उस ज़बाँ को,
जिसपे आए तेरा नाम।
सबसे प्यारी सुबह तेरी,
सबसे रंगीं तेरी शाम,
तुझपे दिल कुर्बान॥१॥

माँ का दिल बन के कभी,
सीने से लग जाता है तू।
और कभी नन्ही-सी बेटी,
बन के याद आता है तू।
जितना याद आता है मुझको,
उतना तड़पाता है तू,
तुझपे दिल कुर्बान॥२॥

छोड़ कर तेरी ज़मीं को,
दूर आ पहुँचे है हम।
फिर भी है यही तमन्ना,
तेरे ज़र्रों की कसम।
हम जहाँ पैदा हुए,
उस जगह ही निकले दम,
तुझपे दिल कुर्बान॥३॥