कैफ़ी आज़मी - होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा, जहर चुपके-से दवा जान के खाया होगा (रफ़ी, मन्ना डे, तलत, भुपिन्दर)


गीतकार : कैफ़ी आज़मीराग :
चित्रपट : हकीकत (१९६४) संगीतकार : मदन मोहन
भाव : विरह गायन : मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, तलत महमूद, भुपिन्दर सिंह
हममऽ, हममऽ
हममऽ, हममऽ
हममऽ
हममऽ।

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा।

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
जहर चुपके-से दवा जान के खाया होगा।
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
होके मजबूर मुझे॥स्थायी॥

दिल ने ऐसे भी कुछ अफसाने सुनाये होंगे,
दिल ने ऐसे भी कुछ अफसाने सुनाये होंगे,
अश्क आँखों ने पिये और ना बहाये होंगे,
बंद कमरे में जो खत मेरे जलाये होंगे,
एक-एक हर्फ जबीं पर उभर आया होगा॥१॥

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
होके मजबूर मुझे।


उसने घबरा के नजर लाख बचायी होगी,
उसने घबरा के नजर लाख बचायी होगी,
दिल की लुटती हुयी दुनिया नजर आयी होगी,

मेज से जब मेरी तसवीर हटायी होगी,
मेज से जब मेरी तसवीर हटायी होगी,
हर तरफ मुझको,
हर तरफ मुझको तड़पता हुआ पाया होगा॥२॥

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
होके मजबूर मुझे।

छेड़ की बात पे अरमां मचल आये होंगे,
छेड़ की बात पे अरमां मचल आये होंगे,
गम दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे,

नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे,
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे,
सर ना काँधे से,
सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा॥३॥



होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
होके मजबूर मुझे।

जुल्फ जिद करके किसी ने जो बनायी होगी,
जुल्फ जिद करके किसी ने जो बनायी होगी,
और भी गम की घटा मुखड़े पे छायी होगी,
बिजली नजरों ने कई दिन ना गिरायी होगी,
रंग चेहरे पे कई रोज ना आया होगा॥४॥

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
जहर चुपके-से दवा जान के खाया होगा।
होके मजबूर मुझे।



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