आनंद बक्शी - ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जाए, मुझे डोर कोई खींचे, तेरी ओर लिए जाए (किशोर)

गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : कटी पतंग (१९७१)संगीतकार :राहुलदेव बर्मन
भाव : शिकायतगायन : किशोर कुमार

हेऽ हमम्ऽ
ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय॥स्थायी॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

दूर रहती है तू,
मेरे पास आती नहीं,
होंठों पे तेरे
कभी प्यास आती नहीं।
ऐसा लगे जैसे कि तू,
हँस के जहर कोई पीए जाए॥१॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

बात जब मैं करूँ,
मुझे रोक देती है क्यों,
तेरी मीठी नजर
मुझे टोक देती है क्यों।
तेरी हया, तेरी शरम,
तेरी कसम मेरे होंठ सीये जाए॥२॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।

एक रूठी हुई
तकदीर जैसे कोई,
खामोश ऐसे है तू
तसवीर जैसे कोई।
तेरी नजर बनके जुबां,
लेकिन तेरे पैगाम दिए जाय॥३॥

ये शाम मस्तानी,
मदहोश किए जाय,
मुझे डोर कोई खींचे,
तेरी ओर लिए जाय।


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