शकील बदायुन - मोहे भूल गये साँवरिया, भूल गये साँवरिया (लता)

गीतकार : शकील बदायुनीराग :
चित्रपट : बैजु बावरा (१९५२) संगीतकार : नौशाद
भाव : विरह गायन : लता मङ्गेश्कर
जो मैं ऐसा जानती,
कि प्रीत किये दुःख होय,
हो नगर ढ़िंढ़ोरा पिटती,
कि प्रीत ना करियो कोय॥अलाप॥

मोहे भूल गये साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।

मोहे भूल गये साँवरिया,
भूल गये साँवरिया।

आवन कह गये, अजहुं ना आये,
आवन कह गये, अजहुं ना आये,
लीनी ना मोरी खबरिया॥स्थायी॥


मोहे भूल गये  साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।

दिल को दिये दुःख बिरहा के,
तोड़ दिया क्यों महल बना के।

दिल को दिये दुःख बिरहा के,
तोड़ दिया क्यों महल बना के।


आस दिला के, ओ बेदर्दी
आस दिला के, ओ बेदर्दी
फेर ली काहे नजरिया॥१॥


मोहे भूल गये साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।

नैन कहे रो-रो के सजना,
देख चुके हम प्यार का सपना।



नैन कहे रो-रो के सजना,
देख चुके हम प्यार का सपना।



प्रीत है झूठी, प्रीतम झूठा,
झूठी है सारी नगरिया॥२॥


मोहे भूल गये  साँवरिया,
भूल गये  साँवरिया।






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