साहिर लुधियानवी - आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया (महेन्द्र कपूर)


गीतकार : साहिर लुधियानवीराग :
चित्रपट : गुमराह (१९६३)संगीतकार : रवि
भाव : रोषगायन : महेन्द्र कपूर
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया॥स्थायी॥

आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था,
शोख नजरों-सी मुहब्बत का सलाम आया था।

उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था,
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था,
आपको देख के वो अहदे वफा याद आया॥१॥

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

रूह में जल उठे बुझती हुयी यादों के दिये,
कैसे दिवाने थे हम आपको पाने के लिये।

यूँ तो कुछ कम नहीं आपने ऐहसान किये,
यूँ तो कुछ कम नहीं आपने ऐहसान किये,
पर जो मांगे से ना पाया वो सिला याद आया॥२॥

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है,
मेरे हिस्से में ये हल्की-सी मुलाकात तो है।

गैर का होके भी ये हुस्न मेरे साथ तो है,
गैर का होके भी ये हुस्न मेरे साथ तो है,
हाय किस वक्त मुझे कब का गिला याद आया॥३॥

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया,
आप आये तो खयाल-ए-दिल-ए-नाशाद आया,
आप आये।




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