कैफ़ी आज़मी - धीरे-धीरे मचल ऐ दिल-ए-बेकरार कोई आता है (लता)


गीतकार : कैफ़ी आज़मीराग :
चित्रपट : अनुपमा (१९६६) संगीतकार : हेमन्त कुमार
भाव : प्रेम गायन : लता मङ्गेश्कर
धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार।

धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार,
कोई आता है।
यूँ तड़प के ना तड़पा मुझे बार-बार
कोई आता है॥स्थायी॥

धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार,

उसके दामन की खुशबू हवाओं में है,
उसके कदमों की आहट फिजाओं में है,
उसके दामन की खुशबू हवाओं में है,
उसके कदमों की आहट फिजाओं में है,


मुझके करने दे करने दे सोलह-श्रृंगार,
कोई आता है॥१॥

धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार,
कोई आता है,
धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार।


मुझके छूने लगी उसकी परछाईयाँ,
दिल के नजदीक बजती है शहनाईयाँ,

मुझके छूने लगी उसकी परछाईयाँ,
दिल के नजदीक बजती है शहनाईयाँ,

मेरे सपनों के आँगन में गाता है प्यार,
कोई आता है॥२॥

धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार,
कोई आता है,
धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार।


रूठ के पहले जी भर सताऊँगी मैं,
जब मनायेंगे वो, मान जाऊँगी मैं,
रूठ के पहले जी भर सताऊँगी मैं,
जब मनायेंगे वो, मान जाऊँगी मैं,

दिल पे रहता है ऐसे में कब इख्तियार,
कोई आता है॥३॥

धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार,
कोई आता है।
यूँ तड़प के ना तड़पा मुझे बार-बार
कोई आता है।

धीरे-धीरे मचल, ऐ दिल-ए-बेकरार।



मेरे अन्य पसंदीदा गीत - भारतीय संगीत @ YouTube

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें