मजरूह सुल्तानपुरी - तेरे मेरे मिलन की ये रैना, नया कोई गुल खिलायेगी (लता, किशोर)


गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरीराग :
चित्रपट : अभिमान (१९७३) संगीतकार : सचिनदेव बर्मन
भाव : प्रेम गायन : लता मङ्केश्कर, किशोर कुमार
हमम्ऽ हो ऽ

तेरे मेरे मिलन की ये रैना
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
नया कोई गुल खिलायेगी
नया कोई गुल खिलायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना॥स्थायी॥

तेरे मेरे मिलन की ये रैना

आऽ आऽ

नन्हा-सा गुल खिलेगा अँगना
सूनी-सी बैयाँ सजेगी सजना
नन्हा-सा गुल खिलेगा अँगना
सूनी-सी बैयाँ सजेगी सजना

जैसे खेले चंदा बादल में
खेलेगा वो तेरे आँचल में
चंदनिया गुनगुनायेगी, चंदनिया गुनगुनायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना॥१॥

तेरे मेरे मिलन की ये रैना

तुझे थामे कई हाथों से
मिलूँगा मदभरी रातों से
तुझे थामे कई हाथों से
मिलूँगा मदभरी रातों से

जगा के अनसुनी-सी धड़कन
बलमवा भर दूँगी तेरा मन
नयी अदा से सतायेगी
नयी अदा से सतायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना॥२॥

तेरे मेरे मिलन की ये रैना
नया कोई गुल खिलायेगी
नया कोई गुल खिलायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना।

तेरे मेरे मिलन की ये रैना।



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