आनंद बक्शी - नफरत की दुनिया को छोड़ के प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार (रफ़ी)


गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : हाथी मेरे साथी संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
भाव : विरह गायन : मोहम्मद रफ़ी
नफरत की दुनिया को छोड़ के
खुश रहना मेरे यार

नफरत की दुनिया को छोड़ के
प्यार की दुनिया में
खुश रहना मेरे यार॥स्थायी॥

नफरत की दुनिया को छोड़ के
प्यार की दुनिया में
खुश रहना मेरे यार

इस झूठ की नगरी से तोड़ के
नाता जा प्यारे
अमर रहे तेरा प्यार
खुश रहना मेरे यार

जब जानवर कोई इंसान को मारे
जब जानवर कोई इंसान को मारे
कहते हैं दुनिया में वहशी उसे सारे
एक जानवार की जान इंसानो ने ली है
चुप क्यों है संसार, खुश रहना मेरे यार॥१॥

बस आखिरी सुन ले ये मेल है अपना
बस आखिरी सुन ले ये मेल है अपना
बस खत्म ऐ साथी ये खेल है अपना
अब याद में तेरी बीत जायेंगे रो-रोके
जीवन के दिन चार, खुश रहना मेरे यार॥२॥


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