साहिर लुधियान्वी - पाँव छू लेने दो फूलों को, इनायत होगी (रफ़ी, लता)


गीतकार : साहिर लुधियान्वीराग :
चित्रपट : ताजमहल (१९६३) संगीतकार : रौशन
भाव : प्रेम गायन : मोहम्मद रफ़ी, लता मङ्गेश्कर
पाँव छू लेने दो फूलों को, इनायत होगी,
इनायत होगी।
वरना हमको नहीं इनको भी शिकायत होगी,
शिकायत होगी।

आप जो फूल बिछायें उन्हें हम ठुकरायें,
आप जो फूल बिछायें उन्हें हम ठुकरायें,
हमको डर है,
हमको डर है कि ये तौहिन-ए-मुहब्बत होगी,
मुहब्बत होगी॥स्थायी॥

दिल की बेचैन उमंगों पे करम फरमाओ,
दिल की बेचैन उमंगों पे करम फरमाओ,
इतना रूक-रूक,
इतना रूक-रूक के चलोगी तो कयामत होगी,
कयामत होगी॥१॥

पाँव छू लेने दो फूलों को, इनायत होगी,
इनायत होगी।

शर्म रोके है इधर, शोख उधर खींचे हैं,
शर्म रोके है इधर, शोख उधर खींचे हैं,
क्या खबर थी,
क्या खबर थी कभी इस दिल की ये हालत होगी,
ये हालत होगी॥२॥

शर्म गैरों से हुआ करती है अपनों से नहीं,
शर्म गैरों से हुआ करती है अपनों से नहीं,
शर्म हमसे,
शर्म हमसे भी करोगी तो मुसीबत होगी,
मुसीबत होगी॥३॥

पाँव छू लेने दो फूलों को, इनायत होगी,
इनायत होगी।
हमको डर है कि ये तौहिन-ए-मुहब्बत होगी,
मुहब्बत होगी।


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