आनंद बक्शी - जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा, उस गली से हमें तो गुजरना नहीं (मुकेश)


गीतकार : आनंद बक्शीराग :
चित्रपट : कटी पतंग (१९७१) संगीतकार : राहुलदेव बर्मन
भाव : समर्पण गायन : मुकेश
जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा,
उस गली से हमें तो गुजरना नहीं।
जो डगर तेरे द्वारे पे जाती न हो,
उस डगर पे हमें पाँव रखना नहीं॥स्थायी॥

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा।

जिन्दगी में कई रंग-रलियाँ सहीं,
हर तरफ मुस्कुराती ये कलियाँ सहीं,
जिन्दगी में कई रंग-रलियाँ सहीं,
हर तरफ मुस्कुराती ये कलियाँ सहीं,
खूबसूरत बहारों की गलियाँ सहीं।

जिस चमन में तेरे पग में काँटे चुभे,
जिस चमन में तेरे पग में काँटे चुभे,
उस चमन से हमें फूल चुनना नहीं॥१॥

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा।

हाँ ये रसमें ये कसमें सभी तोड़ के,
तू चली आ चुनर प्यार की ओढ़ के,
हाँ ये रसमें ये कसमें सभी तोड़ के,
तू चली आ चुनर प्यार की ओढ़ के,
या चला जाऊँगा मैं ये जग छोड़ के।

जिस जगह याद तेरी सताने लगे,
जिस जगह याद तेरी सताने लगे,
उस जगह एक पल भी ठहरना नहीं॥२॥

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा,
उस गली से हमें तो गुजरना नहीं।
जो डगर तेरे द्वारे पे जाती न हो,
उस डगर पे हमें पाँव रखना नहीं।

जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा।



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